राजस्थान में उप प्रधानाचार्य के पद वेतन एवं कार्य।

उप प्रधानाचार्य के कार्य एवं वेतन:-राजस्थान शिक्षा विभाग में उप प्रधानाचार्य(Vice Principal) के 12,421 पदों का सृजन किया गया है। इन पदों पर भर्ती राजस्थान में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों में पीईईओ स्तर तथा शहरी क्षेत्र के क्लस्टर विद्यालयों में व्याख्याता संवर्ग से की जाएगी। प्रत्येक उच्च माध्यमिक विद्यालय में उप-प्रधानाचार्य का एक पद सृजित किया गया है। उप प्रधानाचार्य शैक्षणिक कार्यों के साथ-साथ, विद्यालय के अकादमिक कार्यों तथा विभाग द्वारा प्रदत जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे और प्रधानाचार्य के कार्यों में सहयोग करेंगे।

वाइस प्रिंसिपल क्या है

प्रधानाचार्य के कार्यों में सहयोग करने और विद्यालय में शैक्षणिक तथा गैर शैक्षणिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने, स्टाफ तथा अन्य कार्यों की मॉनिटरिंग करने एवं विद्यार्थियों और संपूर्ण विद्यालय का ऑनलाइन रिकॉर्ड संधारित करने हेतु वाइस प्रिंसिपल का पद सृजित किया गया है।

वाइस प्रिंसिपल क्या होता है? राजस्थान में वाइस प्रिंसिपल के पद। उप प्रधानाचार्य की चयन प्रक्रिया। वाइस प्रिंसिपल का वेतन। वाइस प्रिंसिपल कौन और कैसे बनेगा। वाइस प्रिंसिपल के पद के बारे में संपूर्ण जानकारी।

ज्ञातव्य है कि अब प्रधानाचार्य के पद सीधे व्याख्याता संवर्ग से नहीं भरे जा कर वाइस प्रिंसिपल के पदों से ही पदोन्नति की जाएगी। इसलिए जो उप प्रधानाचार्य की वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर हैं उनके जल्दी ही प्रिंसिपल बनने की संभावना है।

इस तरह से इस प्रधानाचार्य पदोन्नति से व्याख्याता, द्वितीय श्रेणी अध्यापक तथा तृतीय श्रेणी अध्यापक सभी को लाभ होगा क्योंकि उसी अनुपात में पद खाली होते जाएंगे और उन्हें नई भर्ती या प्रमोशन से भरे जाएंगे।

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वाइस प्रिंसिपल के पदों को भरने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है और वाइस प्रिंसिपल के पदों के लिए अस्थाई योग्यता सूची जारी कर दी है। आपत्तियों के निस्तारण के बाद वाइस प्रिंसिपल पदों के लिए स्थाई योग्यता सूची और काउंसलिंग कार्यक्रम जारी किया जाएगा तथा विभिन्न विद्यालयों में वाइस प्रिंसिपल को नियुक्ति दी जाएगी।

वस्तुतः उप प्रधानाचार्य का पद सीनियर विद्यालयों में प्रधानाचार्य के कार्य भार को कम करने, अधीनस्थ विद्यालयों के सफल संचालन के लिए प्रधानाचार्य को अतिरिक्त समय देने और गैर शैक्षणिक गतिविधियों को क्रमबद्ध और निश्चित समय सीमा में पूर्ण करने तथा ऑनलाइन शाला दर्पण पर रिकॉर्ड समय मध्य सीमा में पूर्ण करवाने के उद्देश्य से किया गया है।

राजस्थान में उप प्रधानाचार्य के पद सर्जन, इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया एवं उप प्रधानाचार्य को मिलने वाले वेतन एवं भत्तों तथा उप प्रधानाचार्य के द्वारा किए जाने वाले कार्यौं के बारे में विस्तार से जानते हैं।

उप प्रधानाचार्य के पद

उप प्रधानाचार्य कार्य

मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद और वित्त विभाग तथा शिक्षा विभाग के अनुमोदन के पश्चात राज्य शिक्षा सेवा नियम 2022 में संशोधन करते हुए उप प्रधानाचार्य के 12421 पदों का सृजन किया गया है। यह पद पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी और शहरी क्षेत्र में कलेस्टर विद्यालयों के अनुसार से अनुमोदित किए गए हैं।

1.पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी(PEEO)-प्रत्येक ग्राम पंचायत पर पीईईओ के अधीन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में 9852 प्रधानाचार्य के पद सृजित किए गए हैं प्रत्येक ग्राम पंचायत पर स्थिति विद्यालय में प्रधानाचार्य के साथ एक उप प्रधानाचार्य होगा जिसका पदनाम उप प्राचार्य कहा जाएगा।

2.शहरी संकुल प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी(UCEEO)-शहरी क्षेत्र में 365 प्रधानाचार्य के पद सृजित किए गए हैं।

3. 275 से अधिक नामांकन वाले विद्यालय-ऊपर वर्णित दोनों श्रेणियों में अर्थात ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र के अलावा जिन विद्यालयों में 275 से अधिक नामांकन होगा उनमें उप प्रधानाचार्य की 2204 पद सृजित किए गए हैं।

इस प्रकार से राजस्थान की विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों में 14,421 उप प्रधानाचार्य के पद स्वीकृत किए गए हैं।

राजस्थान सरकार के पिछले आदेशों में उच्च माध्यमिक विद्यालयों के संस्था प्रधान को प्रधानाचार्य के स्थान पर प्राचार्य और उप प्रधानाचार्य के स्थान पर उप प्राचार्य का पद नाम दिया गया है। इसलिए वर्तमान में उप प्रधानाचार्य को उप प्राचार्य के नाम से संबोधित किया जाएगा

उप प्रधानाचार्य के कार्य

राजस्थान सरकार शिक्षा विभाग द्वारा 22 जुलाई 2022 को विभाग के शासकीय आदेश के अनुसार शिक्षा की गुणवत्ता के मध्य नजर शैक्षिक परिवीक्षण तंत्र को सुदृढ़ करने एवं शिक्षा प्रशासन का शैक्षिक कार्यों के सुचारू संचालन एवं संचालन में कार्यकुशलता अभिवृद्धि की प्रत्याशा हेतु राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में राजस्थान शिक्षा सेवा अधिनियम में उप प्रधानाचार्य पद के लिए दायित्व मानदंड एवं कार्यों का निर्धारण किया गया है। विद्यालय के प्रशासनिक कार्य पूर्व की भांति प्राचार्य द्वारा किए जाएंगे। उप प्रधानाचार्य विद्यालय के प्राचार्य के नियंत्रण में रहते हुए विद्यालय के निम्नलिखित कार्यों में दायित्व निभाएंगे।

  • उप प्रधानाचार्य प्रति सप्ताह कम से कम 18 कालांश शिक्षण कार्य करेंगे।
  • प्राचार्य की अनुपस्थिति में जैसे पद रिक्त होने, अवकाश या यात्रा की स्थिति में उप प्रधानाचार्य कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में विद्यालय के संचालन संबंधी सभी दायित्वों का निर्वहन करेंगे।
  • उप प्राचार्य नामांकन कार्य वह नामांकन लक्ष्यों की पूर्ति एवं ठहराव सुनिश्चित करते हुए विद्यालय के क्षेत्राधिकार में ड्रॉपआउट विद्यार्थियों की संख्या को शून्य स्तर पर लाने का कार्य करेंगे।
  • विद्यालय में प्रवेश संबंधी संपूर्ण प्रक्रिया का संचालन करेंगे तथा प्रवेश संबंधी अभिलेख एवं उन्हें शाला दर्पण पर अपडेशन का कार्य करवाएंगे।
  • प्रधानाचार्य कक्षावार एवं शिक्षकवार विद्यालय समय सारणी (Time-Table) का निर्माण करेंगे एवं उसकी पालना करवाएंगे।
  • विद्यालय योजना का निर्माण करना,SDMC से अनुमोदन करवाना एवं उसकी पालना करवाना।
  • प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन एवं प्रबोधन।
  • प्रत्येक माह कक्षा शिक्षण एवं गृह कार्य का परिवीक्षण करेंगे। प्रति 3 माह में प्रत्येक शिक्षक के दो घोषित व दो अघोषित परिवीक्षण।
  • स्थानीय परीक्षा एवं सामयिक परखों का संचालन करेंगे
  • शिक्षकों द्वारा भरी जाने वाली दैनिक डायरी का अवलोकन एवं सत्यापन करेंगे।
  • धूम्रपान निषेध अधिनियम(COPTA) के तहत विद्यालय परिसर में 100 मीटर की परिधि में धूम्रपान मुक्त क्षेत्र बनाए रखने की सुनिश्चित करेंगे। वृक्षारोपण, स्वच्छ भारत, सेनेटरी नैपकिन योजना, शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी कार्यों के पदेन प्रभारी रहेंगे तथा इन कार्यक्रमों के प्रावधानों को विद्यालय में लागू करने हेतु प्राचार्य को आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे।
  • कक्षा 5, 8,10 एवं 12 की बोर्ड परीक्षा परिणाम उन्नयन हेतु कार्य योजना तैयार करेंगे एवं उसकी क्रियान्विति के लिए प्राचार्य का सहयोग करेंगे।
  • विभाग द्वारा समय-समय पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं हेतु पूर्व तैयारी व उनके क्रियान्वयन का कार्य करना।
  • उप प्रधानाचार्य कक्षा 5 व 8 की परीक्षा परिणाम हेतु उत्तरदायी होंगे।
  • विभिन्न अकादमिक प्रतियोगिताओं जैसे-विज्ञान मेला, कला उत्सव, बोर्ड सर्जनात्मक प्रतियोगिताएं, प्रतिभा खोज परीक्षाएं, NMMS स्कॉलरशिप परीक्षा, इंस्पायर अवार्ड, वार्षिक उत्सव, बालसभा एवं विभाग द्वारा समय-समय पर आयोज्य या निर्देशित विभिन्न गतिविधियों एवं क्रियाकलापों इत्यादि में विद्यालय के विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
  • मिड डे मील के तहत पोषाहार वितरण संबंधी गतिविधियों का संचालन हेतु पदेन प्रभारी होंगे।
  • विभाग द्वारा ऑनलाइन पोर्टल-शाला दर्पण अपडेशन, ऑनलाइन उपस्थिति, छात्रवृत्ति पोर्टल एवं अन्य समस्त ऑनलाइन कार्य हेतु प्रभारी होंगे
  • जिन विद्यालयों में दो पारियों में विद्यालय संचालित है उनमें उप प्रधानाचार्य द्वितीय पारी के पदेन प्रभारी होंगे जिस पारी में पांचवी एवं आठवीं कक्षा का संचालन किया जा रहा हो।
  • उप प्रधानाचार्य विद्यालय के कार्मिकों एवं शिक्षकों के आकस्मिक अवकाश स्वीकृत कर सकेंगे
  • SDMC में सदस्य के रूप में कार्य करते हुए बैठकों के आयोजन एवं उनमें पारित निर्णयों की पालना एवं रिकॉर्ड संधारण का कार्य संपन्न करेंगे।
  • प्राचार्य एवं उच्चाधिकारियों द्वारा समय-समय पर सौंपे गए समस्त कार्य करेंगे।

इस तरह से उप प्रधानाचार्य विद्यालय की शैक्षिक और गैर शैक्षिक सभी कार्यों में प्रभारी के रूप में रहते हुए कार्यों को करवाएंगे और प्राचार्य के सहयोगी के रूप में कार्य करेंगे।

उप प्रधानाचार्य का वेतन

नव सृजित उप प्रधानाचार्य के पदों के लिए सातवें वेतन आयोग के अनुसार ग्रेड पे 5400 और लेवल 14 में आरंभिक वेतन 56100 सो रुपए निर्धारित किया गया है।

हालांकि सरकार को इससे कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि व्याख्याता श्रेणी से एवं प्रधानाध्यापक सेकेंडरी स्कूल से पदोन्नत उप प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत पहले से ही इस लेवल को पार कर चुके हैं इसीलिए विभिन्न शिक्षक संगठनों की मांग है कि प्रधानाचार्य के पद को पे लेवल 15 में रखा जाए और उसके अनुसार ही वेतन निश्चित किया जाए।

नए आदेशों के अनुसार उप प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के बाद संबंधित कार्मिक को वेतन में कोई लाभ नहीं होगा बल्कि उसके कार्य निर्धारण और जिम्मेदारियों में अधिक बढ़ोतरी की गई है।

हम यह कह सकते हैं कि उप प्रधानाचार्य का पद वर्तमान में राजस्थान में कार्यरत व्याख्याताओं के लिए कोई लाभप्रद पद नहीं है सिर्फ इसके सिवाय कि उनका पदनाम बढ़ जाएगा। इसीलिए विभिन्न शिक्षक संगठन मांग कर रहे हैं कि उप प्रधानाचार्य पद को लेवल 15 या 16 में रखा जाए जिससे नए पदोन्नत होने वाले कार्मिकों को भी इसका लाभ प्राप्त हो।

वाइस प्रिंसिपल के लिए सीधी भर्ती

विभिन्न शिक्षक संगठनों के द्वारा यह मांग की जा रही है कि उप प्रधानाचार्य पदों के लिए सीधी भर्ती की जाए जिससे तृतीय श्रेणी एवं द्वितीय श्रेणी के शिक्षकों को भी इसका फायदा मिल सके।

हालांकि अभी यह ज्ञात नहीं है कि उप प्रधानाचार्य कौन सी कक्षाओं को पढ़ाएगा? और उनके स्थान पर कौन से पदों को समाप्त किया जाएगा?

जब उप प्रधानाचार्य के लिए विद्यालय में 18 कालांश लेना अनिवार्य होगा तो वह किस अध्यापक के कालांश लेगा?

विद्यालय यदि विज्ञान वाणिज्य फैकल्टी से संबंधित है और उसमें आर्टस से संबंधित व्याख्याता की उप प्रधानाचार्य में नियुक्ति की जाती है तो वह कौन सा सब्जेक्ट पढ़ाएगा?

ज्यादा संभावना यही है कि उप प्रधानाचार्य का पद केवल राजनीतिक लाभ के लिए सर्जित किया गया है जो कि आने वाले समय में प्राचार्य और उप प्राचार्य के बीच टक्कर की लड़ाई भी बन सकता है। इस संबंध में विभाग को जरूरी आदेश पारित करने चाहिए और साथ यह भी निर्धारित करना चाहिए कि वह प्रधानाचार्य के पद पर डीपीसी या सीधी भर्ती से पद भरे जाएंगे।

राजस्थान में बहुत समय पहले उप प्रधानाचार्य का पद सृजित था। केंद्र में अभी भी वाइस प्रिंसिपल का पद है जो सीधी भर्ती और प्रमोशन से भरे जाते हैं। केंद्र में वाइस प्रिंसिपल के पद चयन प्रक्रिया आदि के बारे में विस्तार से जानने के लिए यह पोस्ट पढ़ें।

केवीएस वाइस प्रिंसिपल और प्रिंसिपल पद के लिए योग्यता और चयन प्रक्रिया

उप प्रधानाचार्य भर्ती और चयन प्रक्रिया: वाइस प्रिंसिपल भर्ती के लिए विभिन्न शिक्षक संगठनों और बेरोजगार संगठनों द्वारा सरकार से अपील की जा रही है कि इन पदों पर 50 प्रतिशत सीधी भर्ती की जाए परंतु सरकार ने अभी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने उप प्रधानाचार्य के पदों के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है इसलिए यदि वाइस प्रिंसिपल के पदों पर सरकार भविष्य में कोई निर्णय नहीं लेती है तो यह पूरे पद प्रमोशन से ही भरे जाएंगे।

इस विषय पर आप अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं परंतु अभी उप प्रधानाचार्य की पोस्ट भरने के लिए सरकार के पास पर्याप्त समय है और भविष्य की समस्याओं जैसे उप प्रधानाचार्य की स्थानांतरण, उनके विषय का चयन आदि की भी नीति स्पष्ट होनी चाहिए।

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तथापि जितने सारे कार्य उप प्रधानाचार्य के गिनाए गए हैं, वो सभी उप प्रधानाचार्य नहीं करेगा। संबंधित प्रभारी के सहयोग से ही यह कार्य किए जाएंगे और प्रधानाचार्य इसकी मॉनिटरिंग करेगा जिस प्रकार से पहले प्रधानाचार्य करते आ रहे हैं। धन्यवाद। इस विषय में अपने विचार अवश्य प्रस्तुत करें।